World Cancer Month 2023: जागरूकता बचाव की ओर एक महत्वपूर्ण कदम

by Dr Amit Jotwani
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वर्ल्ड कैंसर मंथ के सम्मान में डॉ. अमित जोतवानी, ओंको के चीफ ऑनकोलॉजिस्ट, अपने विचार इस मुद्दे पर व्यक्त किए हैं कि कैसे एक जिम्मेदार समाज के रूप में हम कैंसर को होने से रोक सकते हैं।

इंसान उम्मीद और खुशी से भरा रहता है जब वह अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और सुरक्षा का अनुभव करता है। ऐसे समय में वह ये भूल जाता है कि हम कितने नाजुक हैं और अपने स्वास्थ्य को तबतक अनदेखा करता है, जबतक ये हमारी दिनचर्या को प्रभावित ना करे। सबसे बड़ा खतरा जिसका सामना आजकल हम सब कर रहे हैं वह है खुद के स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती हुई लापरवाही। 

ज्यादा से ज्यादा लोगों को आजकल खतरनाक बीमारियां हो रही हैं जैसे किडनी फेल होना, हृदयरोग और सबसे जरूरी कैंसर, और फिर भी हम समाज के रूप में इन भयानक संकेतों को नजरअंदाज करते हैं। 

ऐसा अनुमान लगाया गया है कि दस में से एक भारतीय को जीवन के किसी अवस्था में कैंसर का सामना करना पड़ सकता है। कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य संबंधी और मानवीय मुद्दा है जिसे तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। 

कैंसर से निपटने के तीन तरीके हैं–

पहला यह है कि कैंसर के दोबारा होने की प्रक्रिया को कम करना, दूसरा यह है कि इसकी पहचान जल्दी हो जाए और तीसरा यह है कि इसका समय से ठीक इलाज हो। 

तीन कारण जिनसे कैंसर के बढ़ते हुए मामले सामने आ रहे हैं वह है बदलती जीवनशैली, खाने की आदतें, और कार्सिनोजेन्स से बढ़ता हुआ संपर्क। जैसे हम ज्यादा से ज्यादा आधुनिकता देख रहे हैं, उतना ही लोग कम शारीरिक गतिविधियों वाली सुस्त जीवनशैली अपनाते हैं। अब ऐसा कहा जाता है कि दिनभर बैठे रहना भी एक प्रकार का धूम्रपान है क्योंकि इसके भी उसी प्रकार के नुकसान होते हैं जो धूम्रपान से होते हैं।

शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण शरीर में खतरनाक बदलाव होते हैं जो कि शरीर के अंदर कैंसर के विकास के लिए अनुकूल माहौल पैदा करते हैं। कई सामान्य कैंसर जैसे ब्रेस्ट और कोलोन कैंसर, के कारण सुस्त जीवनशैली है और इस खतरे को कम करने के लिए लगातार कसरत करने की सलाह दी जाती है।

दूसरा कारक जो कैंसर के विकास में सहायक है वह है बदला हुआ खान–पान। हम जैसे-जैसे अपने काम और जीवन में व्यस्त होते जाते हैं, हम ताजा और स्वस्थ खाने की कीमत को अनदेखा कर देते हैं। हम ज्यादा खतरनाक स्तर वाले प्रिजर्वेटिव खाते हैं और हमारे प्लेट से खाने की विविधता खत्म हो रही है। 

कई प्रकार के ताजा खाना खाने से हमारे इम्यून सिस्टम को जरूरी पोषक तत्व और मिनरल मिलते हैं जो कि बीमारियों के शुरू होते ही उनसे लड़ने की क्षमता देते हैं। प्रिजर्व किए गए खाना को खाने से इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है और असामान्य कोशिकाओं से उनके शुरुआती स्टेज में लड़ने की क्षमता को कम करता है, जिससे इनके विकास को बढ़ावा मिलता है और ये कैंसर का रूप ले लेते हैं। 

तीसरा और सबसे जरूरी कैंसर का कारण है कैंसर पैदा करने वाले केमिकल कार्सिनोजेन के संपर्क में आना। शोध की मानें तो, ऑटोमोबाइल के धुएं से बढ़ता हुआ प्रदूषण, निर्माण कार्य, और कम होती हरी भरी जगहें कैंसर के बढ़ते हुए मामले के मुख्य कारण हैं, खास तौर पर, फेफड़े और पेट के अंगों के कैंसर। तंबाकू का हर रूप में सक्रिय उपयोग (चबाना, धूम्रपान) सीधे तौर पर सिर और गर्दन और भोजन नली के कैंसर का कारण बनता है। शराब के सेवन से सीधे कई प्रकार के कैंसर होते हैं जिसमें लिवर और पेट के कैंसर शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, कुछ कैंसर वायरल संक्रमण के कारण हो सकते हैं जैसे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस जो सर्वाइकल और जननांग कैंसर का कारण बनता है, हेपेटाइटिस बी और सी वायरस लीवर कैंसर का कारण बन सकते हैं और एचआईवी वायरस कई अन्य कैंसर का कारण बन सकता है।

कैंसर से बचाव के लिए हम क्या कर सकते हैं?

स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान दें – सही वजन और सक्रीय जीवनशैली जी कर हम कैंसर होने के खतरे को कम कर सकते हैं। जीवनशैली में मामूली बदलाव कैंसर से बचाव की तरफ एक शुरुआत हो सकती है। प्रोसेस्ड फूड, रेड मीट, शक्कर वाले पेय आदि से बचकर आप एक बदलाव कर सकते हैं। ताजा फल और सब्जियां खा कर भी आप इस बदलाव के भागीदार हो सकते हैं। इससे कैंसर होने की संभावना 70% तक कम हो जाती है। 

समाज में जागरूकता फैलाएं – कैंसर के प्रति जागरूकता पर्यावरण और जीवनशैली के लिए कम्युनिटी में एक सामूहिक कदम है। स्वास्थ्य जागरूक समाज सभी को स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।

खुद की जांच कराएं- जब कैंसर की बात आती है तो कोई अजेय नहीं हैं। साल में एक बार स्वास्थ्य की जांच कराने से किसी असामान्यता का पता चल जाता है जिसे ध्यान की जरूरत होती है। अपने ब्रेस्ट में किसी प्रकार के गांठ की नियमित जांच करने के लिए रिमाइंडर लगाएं। ब्रेस्ट कैंसर भारत की औरतों में सबसे आम कैंसर है और अगर शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो इसका आसानी से इलाज भी संभव है।

अपने डॉक्टर से अपने कैंसर के पारिवारिक इतिहास के बारे में बात करें, जिससे यह पता चल सके कि आप को कौन से स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने चाहिए। ब्रेस्ट और सर्विक्स के कैंसर की पहचान मामूली से स्क्रीनिंग टेस्ट द्वारा शुरुआती स्टेज में ही हो जाती है।

तंबाकू छोड़ें– तंबाकू कैंसर का सबसे ज्यादा रोके जाने वाला कारण है। ब्रेस्ट और सर्विक्स कैंसर के बाद भारत में सबसे सामान्य प्रकार के कैंसर हैं होंठ और ओरल कैंसर। तंबाकू इस प्रकार के कैंसर के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। अलग–अलग प्रकार के कैंसर का कारण बनने के अलावा, जिसमें लंग, मुंह और सर्वाइकल कैंसर शामिल हैं, तंबाकू से और भी कई बीमारियां होती हैं। अगर आपको तंबाकू छोड़ने में दिक्कत आ रही है तो नशा मुक्ति काउंसलर से बात करके मदद लें।

कैंसर जागरूकता के प्रति हमारा कदम

हमें स्वस्थ जीवनशैली और किसी भी कीमत पर पर्यावरण को बचाने की संस्कृति को लाने की जरूरत है और वापस से स्वस्थ खाने की आदतों पर जाना होगा, जहां हम प्रिजर्व खाने को खाना कम करें और ताजे फल और सब्जियों को ज्यादा लेना शुरू करें। 

दूसरा, कैंसर केयर सभी तक आसानी से पहुंच सके और समान रूप से सभी को इसका फायदा मिले इसके लिए बहुत काम करने की जरूरत है। कैंसर की स्क्रीनिंग करके सटीक और जल्दी पहचान हो इसके लिए और भी प्रयास की आवश्यकता है।  

हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हर कैंसर के मरीज को सही और समय से केयर मिले। अलग अलग दृष्टिकोण से अपनी पहुंच रख कर हम प्रभावी रूप से कैंसर के बोझ को समाज में कम कर सकते हैं।

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