किसी की मदद करने के लिए, उसका करीबी होना ही जरूरी नहीं !

by Team Onco
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कोई व्यक्ति जब अपने जीवन में किसी बुरे वक्त का सामना करता है तो उससे उभरने के बाद उसके लिए दूसरों का वो दर्द काफी करीबी से नजर आता है। अपनी जिंदगी में दर्द का अनुभव तो काफी लोग करते हैं, लेकिन उसी अनुभव के दम पर दूसरों के दर्द को कम करने का काम सभी लोग नहीं कर सकते हैं। दिल्ली के रहने वाले पुखराज सिंह, बच्चों, युवा कैंसर रोगियों और उनके परिवारों के समर्थन का एक मजबूत कंधा बनकर सामने आए हैं। 

पुखराज पिछले 9 सालों से कैंसर ग्रस्त लोगों को मानसिक और भावनात्मक समर्थन देने का काम करते हैं।

पुखराज पिछले 9 सालों से कैंसर ग्रस्त लोगों को मानसिक और भावनात्मक समर्थन देने का काम करते हैं। पुखराज का मानना है कि कैंसर मरीजों के लिए डाॅक्टर जहां एक तरफ जरूरी किरदार है, वहीं ऐसे बुरे वक्त में किसी का साथ बेहद जरूरी है, जो इंसान को उस बीमारी से उभरने में काफी अहम भूमिका निभाता है। 

एम्स के आसपास फुटपाथों और धर्मशालाओं में रहने वाले सैकड़ों लोग ऐसे बच्चे हैं जिनके पास इलाज के लिए साधन नहीं है, काउंसलिंग की तो बात ही छोड़िए। पुखराज का साथ उनके लिए उनके लिए कुछ ऐसा काम करता है कि वे अपने इस कैंसर के सफर में अकेला महसूस न करें, उनके पास कोई है जो उनकी भावनाओं की परवाह करता है। 

पुखराज ने अपने निजी जीवन में इस तरह का दर्द महसूस किया है। 12 साल पहले उनके बेटे को ब्लड कैंसर हो गया था, इस वक्त से उन्होंने काफी कुछ सीखा, साथ ही तबसे वह कैंसर से जूझ रहे लोगों के साथ जुड़ने का काम करते हैं, अब उनके जीवन का मकसद केवल इन लोगों की मदद करना है।

अपने एनजीओ के जरिए वह अलग-अलग जगह जाते हैं, जहां वे कैंसर पीड़ित लोग और उनके परिवार से मिलते हैं, पुखराज उन्हें कई पॉजिटिव कहानियां बताते हैं जिससे ठीक होने की उम्मीद और ज्यादा बढ़ जाए। इस वक्त में लोगों का सकारात्मक रहना बहुत जरूरी होता है, जो उन्हें जल्दी ठीक होने में मदद करता है।

हालांकि पुखराज का कहना है कि हम इलाज की गारंटी किसी को नहीं दे सकते, लेकिन वह जो सहानुभूति और जोश लोगों में भरते हैं, वह लोगों को उनके डर से निपटने में मदद करता है। पुखराज ने बताया कि वह हर दिन बहुत से लोगों को अलग-अलग मुद्दों से गुजरते हुए देखते हैं, लेकिन एक चीज जो उनके जीवन में आशा लाती है, वह है किसी ऐसे व्यक्ति से गर्मजोशी से गले मिलना, जिसे वे जानते हैं कि वह उनके जैसे दर्द से गुजर रहा है और कोई है जो उन्हें सुनना चाहता है। कभी-कभी, एक जादू की झप्पी सभी की जरूरत होती है। 

वह नियमित रूप से कैंसर से पीड़ित 40-50 बच्चों  के लिए महीने में दो से तीन से डे केयर कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इसके साथ ही उन्हें पार्टीज देते हैं, मेले में ले जाते हैं, जिससे उन्हें खुशी मिलें। कैंसर होने के बाद लोगों में आशा नहीं रह जाती, लेकिन सकारात्मक व्यवहार उनकी बीमारी को भूलने और उसे कम करने में काफी मददगार होता है।

पुखराज नियमित रूप से कैंसर से पीड़ित 40-50 बच्चों  के लिए महीने में दो से तीन से डे केयर कार्यक्रम आयोजित करते हैं

पुखराज की इस काम से कैंसर के जूझ रहे ऐसे कई लोग हैं, जो खुशी- खुशी अपना जीवन इस बुरे वक्त में पार कर लेते हैं उनकी मानें तो मरते-मरते अगर हम किसी को हंसा दे या उसे खुशी दे दें तो क्या पता उसके जीवन के कुछ दिन और बढ़ जाएं।

जब आपके घर में कोई कैंसर से ग्रस्त होता है, तो उसके देखभालकर्ता के रूप में परिवार को कोई सदस्य ही उसके साथ रहता है। लेकिन पुखराज सिंह हर उस बच्चे और कैंसर पीड़ित के साथी है, जिन्हें वह शायद जानते भी नहीं। पुखराज का यह व्यवहार हम सभी को यह सीख देता है कि किसी की परेशानी को कम करने के लिए या उसके बुरे वक्त में उसका साथ देने के लिए आपको उसके करीबी या दोस्त होना ही जरूरी नहीं है, आप अपने व्यवहार किसी के भी चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं​​।

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