स्तन कैंसर: पढ़ें सीमा की कहानी (पार्ट 1), कुछ तो गड़बड़ है!

by Team Onco
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सीमा के घर से हमेशा शोर की आवाज़ आती है, लेकिन ये शोर किसी लड़ाई या झगड़े का नहीं, बल्कि एक खुशहाल परिवार का है। जहां उनका तीन साल का बेटा है, जो हमेशा किसी न किसी तरह की शरारत करता रहता है। टीवी पर हमेशा न्‍यूज़ और स्पोर्ट्स चैनल्‍स ऑन रहते हैं, जो उनके पति को काफी पसंद है। उनकी काम वाली काफी बातूनी है, जो प्रेशर कुकर की सीटी, वाशिंग मशीन और बर्तनों के बजने की आवाज़ के बीच अपने पड़ोसियों के किस्‍से सुनाती रहती है। 

सीमा का घर व्यस्त सड़क के ऊपर ही है। जहां इस महामारी के बीच भी नीचे ट्रैफ़िक की आवाज़ उनके घर की खिड़कियों तक आ ही जाती है। 

फोन बजने की आवाज़, चलता हुआ मिक्सर और घर के अंदर ही उनके बेटे की साइकिल की सवारी… ये सभी आवाज़ें मिलकर हलचल-सी लगती हैं, लेकिन ये एक खुशहाल परिवार के घर से आने वाला शोर है। 

इस शोर के बीच, सीमा अपने लैपटॉप के आगे बैठकर अपनी रिपोर्ट (जो कल बाकी थी) को पूरे ध्‍यान के साथ पूरा करती है। एक मीटिंग और दो ईमेल भेजने के बाद, उन्‍हें अपने परिवार के लिए दोपहर का खाना भी बनाना है। 

धनिया काटने और टेबल लगाने के बीच, सीमा को अचानक याद आया कि आज सुबह नहाने के दौरान उन्‍होंने अपने बाएं स्तन में एक गांठ महसूस की थी। हालांकि, सीमा ये बात यकीन से नहीं कह रही थी कि आखिर वह क्‍या है। इस गांठ में कोई दर्द तो नहीं था, लेकिन बस कुछ भारी-सा महसूस हो रहा था … इसी बीच उनके बेटे ने कहा कि उसे भूख लगी है और वह उस बात को भूल कर अपने बेटे को खाना परोसना शुरू कर देती हैं।  

उसी दिन शाम के वक्‍त, सीमा अपने बेडरूम में एक फिर से उस गांठ को महसूस करने की कोशिश करती हैं।

कैंसर ? अचानक से ऐसा लगा कि शोर थम-सा गया है। सब कुछ काफी शांत-सा हो गया। बढ़ती हुई दिल के धड़कनों के अलावा सीमा को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। 

सीमा ने खुद को शांत करने की कोशिश की। यह नामुमकिन है। यह कैंसर कैसे हो सकता है? मिल्क सिस्ट भी तो हो सकती है। उनकी बहन को पहले यह मिल्क सिस्ट हो चुकी हैं… लेकिन फिर भी अंदर कुछ था, जो उन्‍हें इस बात पर यकीन नहीं करने दे रहा था। 

अगली सुबह वह अपने ऑफिस के सहयोगियों के साथ एक ऑनलाइन मीटिंग के लिए बैठ जाती हैं। मीटिंग शुरू होने के इंतज़ार के बीच उन्‍होंने “स्तन में गांठ” के बारे में जल्‍दी से गूगल सर्च किया। जाहिर सी बात है परिणाम उन्‍हें अपना लैपटॉप बंद करने के लिए मजबूर कर देते। सीमा ने वह टैब को बंद कर दिया और मीटिंग में ध्‍यान लगाया।  

उस रात, जब सब सो रहे थे, तब सीमा अपना फोन लेकर बिस्तर पर बैठी थी। उन्‍हें विश्‍वास नहीं हो रहा था कि क्या गड़बड़ होगी, न वह जानने की हिम्‍मत जुटा पा रही थी। लेकिन आखिर में उन्‍होंने एक गहरी सांस ली और फिर से “स्तन में गांठ” के बारे में गूगल किया। 

इसके बाद उन्‍होंने अपना बाकी का वक्‍त अलग-अलग वेबसाइट्स पर स्तन कैंसर के लक्षणों और इसके जोखिम के कारणों की लिस्‍ट को ढूंढने में लगा दिया। यह सब पढ़ कर उनका आत्मविश्वास बढ़ा कि उन्‍हें कैसर नहीं है।

क्यों? आइए स्तन कैंसर के लक्षणों पर एक नज़र डालें:

 

सीमा को अब कुछ राहत मिली है। उन्‍हें केवल एक दूसरा वाला लक्षण है, और बाकी में से कोई भी नहीं। 8 में से एक ही लक्षण होना इतना डरावना नहीं है!

आइए उस लिस्‍ट पर नज़र डालें जिन्‍हें स्तन कैंसर होने की संभावना होती है:

इनमें से सीमा को एक भी कारक नहीं है। 0/10! तो जाहिर तौर पर यह कैंसर नहीं हो सकता है। जान में जान आ गई! वह अब चैन की नींद सो सकती है।

सीमा ने सोने के लिए अपनी आँखें बंद की, लेकिन अंदर से फिर भी उन्‍हें कुछ भाव महसूस हो रहा था कि अगर यह कैंसर नहीं है, तो फिर क्या है?

इससे पहले इस बात को और वक्‍त गुजरता सीमा ने अपने पति को इस गांठ के बारे में बताया। यह जानकर वह भी उतने ही परेशान थे जितनी कि सीमा। “यह मिल्‍क सिस्‍ट कैसे हो सकती है” उन्‍होंने पूछा, “तुमने को कुछ साल पहले ही स्तनपान करना बंद कर दिया था न?”

सीमा उनकी इस बात से सहमत हुई। हो सकता है कि मिल्‍क सिस्‍ट न हो, लेकिन कैंसर भी नहीं। फिर क्या? 

इस बात को एक महीने से अधिक समय बीत चुका था जब उनके पति ने उनसे पूछा था कि क्या गांठ अब चली गई है। नहीं, यह अभी भी है। उस गांठ को महसूस करने के साथ उन्‍हें काफी तेज़ घबराहट हुई। क्या यह बड़ी हो रही है? या फिर यह उनका वहम होगा। नहीं, यह पिछली बार की तुलना में थोड़ी बड़ी महसूस हो रही थी।  

“बेहतर होगा, आज इसे डॉक्टर को दिखाएं,” उसके पति ने कहा। ‘’कम से कम एक बार डॉक्टर तुम्‍हें बता देगा कि यह कुछ नहीं है, तो तुम्‍हारी परेशानी भी कम होगी’’। 

सीमा ने कहा, “मैं अगले हफ्ते जाऊंगी,” मुझे आज कुछ काम खत्म करना है और ..” 

“पहले जाकर डॉक्‍टर को दिखाओ। काम तो हमेशा ही रहता है।’’

पति की बात मान कर उन्‍होंने बेमन से अपनी प्रसूतिशास्री (गायनोकोलॉजिस्ट) का अपॉइंटमेंट लिया।   

उसकी प्रसूतिशास्री (गायनोकोलॉजिस्ट) ने शारीरिक रूप से उसके स्तनों की जांच की और उन्‍हें वो गांठ मिली। 

जिसके बाद सीमा ने डॉक्‍टर से उन सवालों की लाइन लगा दी जो पिछले कुछ महीनों से उसके दिमाग में चल रहे थे:

 

डॉक्टर ने सीमा को दो टेस्‍ट कराने को कहा : 

 

सीमा के चेहरे की घबराहट को देखते हुए, डॉक्टर ने उन्‍हें बताया कि, “ये बहुत ही सरल प्रक्रियाएँ हैं, सीमा। जो एक-दो घंटे में हो जाएगी। इसके लिए आपको भर्ती नहीं होना पड़ेगा। आपको किसी भी तरह से तैयारी नहीं करनी है, इसलिए आप इन्हें जल्द से जल्द करा सकती हैं। ”

“सोनोमैमोग्राफीसिर्फ एक स्तन अल्ट्रासाउंड है। यह एक्स-रे करवाने जैसा ही है। आपको बस बिस्तर पर लेटना होगा और अपके स्तन पर जेल लगाया जाएगा। इसके बाद आपके स्तन और बग़ल

के क्षेत्र की स्कैन के जरिए जांच की जाएगी। इसमें आपको किसी तरह का दर्द भी महसूस नहीं होगा। ”

probe used for sonomammography

सोनोमैमोग्राफी में इस्तेमाल होने वाली मशीन

“लेकिन डॉक्टर बायोप्सी, के बारे में क्या? क्‍या यह एक ऑपरेशन नहीं है?

“हर्गिज नहीं। इस प्रकिया में हम एक सुई की मदद से गांठ से एक छोटे ऊतक को निकालेंगे, ताकि हम समझ सकें कि यह क्या है। कोई ऑपरेशन नहीं होगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आप घर वापस जा सकते हैं। इसमें बस लगभग एक घंटा लगेगा।

सीमा तुरंत दोनों टेस्‍ट करवाने के लिए सहमत हो गई। 5 से 7 दिनों में रिपोर्ट उनके पास होगी। उसके बाद, यह रहस्य आखिरकार हल होगा।

अब रिपोर्ट्स में क्‍या आएगा? आपको क्‍या लगता है ?

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